𝐏𝐫𝐢𝐦𝐞 𝐃𝐞𝐛𝐚𝐭𝐞 𝐖𝐢𝐭𝐡 𝐃𝐫 𝐊𝐚𝐬𝐡𝐢𝐤𝐚 𝐉𝐚𝐢𝐧 𝐎𝐧 𝐍𝐚𝐭𝐢𝐨𝐧𝐚𝐥 𝐍𝐞𝐰𝐬 𝐂𝐡𝐚𝐧𝐧𝐞𝐥 𝐍𝐞𝐰𝐬𝟏𝟖 𝐔𝐫𝐝𝐮
लुट कर दो है आधा इस्तमाल यह आप देख रहें हैं प्राइम डिबेट मैं हूं आपके साथ अबू है मलखे इस वक्त नाजुक दौर से गुजर रहा है पुराणों वायरस जिंदगी के तकरीबन हर शोबे को मुतास्सिर किया है मूल के किसान मजदूर और बुनकरों के सामने एक बार फिर शदीद दौरान पैदा हो गया है सरकार की तरफ से 20 लाख करोड़ के भारी-भरकम पैकेज का ऐलान किया गया है कि इस पैकेज से गरीब किसान मजदूर और बुनकरों को राहत मिल रही है इसके अलावा मुश्किल हालात और रोजमर्रा की जिंदगी पर इनके क्या कुछ अच्छा रात भर तब हो रहे हैं और फिर ना वह बाकी है इस दौर में आखिर जिंदगी हमवार कैसे हो आज इसी पर अपराधी पर चर्चा करेंगे बहुत खास है मेरे साथ जुड़ेंगे तो सवाल यह उठता है कि करो न के इस दौर में आखिर जिंदगी हमवार कैसे हो क्योंकि गरीब मजदूर हो बुनकर हो किसान हो या इनके सामने कब बड़ा चैलेंज जरूर है पिछले तीन चार महीनों से जिन पूरी तरह से ठप है अब जब की रोजमर्रा की जिंदगी की चीजें बहुत और बड़े पैमाने पर इस तरह से खुली शुरू हुई है लेकिन अभी भी यह बाकायदा पूरे तौर पर यह सारी चीजें शुरू नहीं हो पाई हैं ऐसे समय इकतरफा करो ना का जो पहले वह लगातार बढ़ता जा रहा है दूसरी तरफ पिछले तीन-चार महीने से जो कारोबार है जो कारोबारी सरगर्मियां है वह इस तरह से ठप है वह इंसानों की जिंदगी में किस तरह से बहनी दबाव क्या कुछ है जो प्रेशर है वह किस अ कितना ज्यादा है यह कितना प्रेशर पड़ा है इससे भी MS Word एक कोशिश करेंगे कि ज्यादा दबाव कितना ज्यादा है और इसके अलावा सरकार की तरफ से क्या कुछ और कदम उठाए जा रहे हैं कि इस तरह से आप और मजदूर गरीब किसान बुनकरों की जो जिंदगी है जो जिंदगी के कर रहा है उसे हम वार करने के लिए क्या कुछ किया जा रहा है क्या जो पैकेट वर्ष यादव नरेंद्र मोदी की तरफ से ऐलान किया गया सेंटर की तरफ से क्या उसे भारी भरकम अ पैकेज की वजह से अब राहत मिल रही है गरीबों को लोगों को बुनकरों को और इसके अलावा किसानों को इस पीएम आप समझेंगे बहुत और हाथ मेरे साथ रोडवेज में जोड़ है बहुत जल्दी पर मेहमानों का आपसे तारु करा देता हूं मेरे साथ शैलेश पांडे जी है तर्जुमान है शिवसेना के सैयद अफजल अब्बास साहब है सीनियर लीडर हैडिंग के और अक्षर ए साथ और डिबेट में जुड़ते हैं डॉक्टर और कृषि विकास जैन जी हैं साइकोलॉजिस्ट है वह नियर दबाव कितना कुछ इस दौर में लोगों पर है इस पर भी मक्षिका जी से बात करेंगे तीनों बहनों का बहुत इस्तकबाल वेलकम यूनिवर्सिटी के उर्दू में कुछ देर में बीजेपी और कांग्रेस के लीडर भी हमारे साथ इससे रोडवेज का हिस्सा होंगे मैं सबसे पहले का शिकार जाएंगी मैं आपसे शुरुआत कर लेता हो क्योंकि पिछले तीन-चार महीनों से जिंदगी पूरी तरह से ठप है लोगों के सामने के डर और हाफ और जितनी तेजी से इस वक्त रोना के मामले बढ़ रहा है लोगों में डर और सौंफ और ज्यादा बढ़ गया है मैं आज एडिलेड पर्थ मुखर्जी समझना है चारों के लोगों में रहने तनाव और कितना ज्यादा होगा यह सहनी तनाव के चलते लो क्विक इस तरह की परेशानियां होंगी इस परेशानी से गुजर रहे हैं हां जी आदि कि आपने बिल्कुल ठीक कहा कि जो भी कहूंगा कि कैसे इस टाइम बढ़ रहे हैं तो लोगों में मानसिक तनाव जो है वह भी बहुत ज्यादा बढ़ रहा है और अभी आ मेंटल हेल्थ रिपोर्ट सौंपी है उसमें बताया गया है कि 2230 परसेंट चैनल डिप्रेशन के केस बढ़ गया है लोगों में रिटेंशन बढ़ रही है लोगों में गुस्सा बढ़ रहा है और उन्हें इनसिक्योरिटी बढ़ रही है क्योंकि उनको दिखाई दे रहा है अपना फ्यूचर टाक ने किया कि वह काम नहीं करेंगे इस तरह से आप ईयर में जाइए तो किस तरीके से उनका घर चलेगा तो उनकी आपसी रिश्ते भी इस वजह से इफेक्ट हो रहा है और उनकी जो मेंटल एबिलिटी है वह बीच हो रही है इससे भी कोने में है कि जिसकी वृति ज्यादा स्ट्रॉन्ग है उसको कोर्नर का उत्साह कम खतरा है इसी तरीके से हमारी मेंटल एबिलिटी भी होती है लेकिन जो हमारे गरीब ही हैं और को दिखाई दे रहा है कि रोजाना का कमाना और उठाना उनके घर चलता है उनको यह बात समझ में आनी कि आप रिलैक्स प्रभु सब बहुत जल्दी ठीक हो जाएगा यह थोड़ा सा मुश्किल होता है यह बातें उन्हीं को ज्यादा समझ में आ कि जिनके पास कुछ सेविंग सोती हैं लेकिन ज्यादा घर रुक जाना या कमाई पर चलता है उनको यह सारी बातें ऐसी लगती है जैसे कुछ किताबी बातें जर्सी पर सभी को हमको यह ध्यान रखना होगा कि ऐसे में अगर हम अपने आपको तनाव में खेलेंगे तो उससे हमारे शरीर पर हमारे मन पर दुष्प्रभाव पड़ेगा उससे हमारे को यह खतरा और ज्यादा बढ़ जाएगा तो इस टाइम हमको चिड़चिड़ाना नहीं है इस टाइम हमें गुस्सा नहीं उन्हें हम यह नहीं देखना है कि सरकार क्या कर रही है यह कोई और क्या कर रहा है हमें यह देखना है कि हम कितनी सावधानी रखकर अपने काम को कर सकते हैं और शांत रह सकते हैं क्योंकि हमारा शरीर और मन जब दोनों मजबूत होगा तभी हमें अंधेरे में कुछ नई रोशनी नजर आएगी और इसी तरीके से हम अपने आप को आगे बढ़ा सकते हैं क्योंकि अभी को रोना के साथ हमें कुछ महीने हो सकता है उससे भी ज्यादा रहना पड़े ऐसा भी पॉसिबल है कि आप घर में ही रहेंगे वे सिर्फ मैंने भी अब के लिए अपना स्टार्ट कर दिया है तो हम भी जाते हैं और हमें क्या सारे लोग जा रहे हैं तो ध्यान रखें कि खिलाफ पहनी है बार-बार हाथों अगर आपने किसी ऐसी चीज को टेक्स्ट मैडम आप बहुत सारे लोग टच करते हैं मास्क पहनकर निकले आप इसी तरीके से और बहुत ही रिक्वेस्टिड है मैं हमेशा सबको समझा दूं कि आपको ऐसे मानना है कि जैसे सामने वाले को को रोना है मतलब यह थोड़ा सा बोलने में भी गलत लगता है और सुनने वाले को भी शायद अच्छा ना लगे बट हमें अपने माइंड में ही पिक करना है सिर्फ चीज सामने वाले को जैसे कौन है तो हमें विकेट और बहुत तो बहुत नाजुक वक्त है और एहतियात बहुत जरूरी है और ऐसे वक्त में जर्नी तौर पर बहुत मजबूत रहने की जरूरत है थोड़ा डॉक्टर कशिका आज जिस तरह से आपने कहा कि यह हालात जो है इसलिए सबसे ज्यादा लोगों को चाहिए कि वह इन तौर पर मजबूत रहें क्या कुछ करने की जरूरत है क्योंकि quora का डर तो एक तरह से पब्लिक के सामने है दिन-ब-दिन कैसे बढ़ रहे हैं ऐसे में लोगों को क्या कुछ करने की जरूरत है कि वह जमीनी तौर पर एक तरह से मजबूत रहें हैं यह देखिए कोई भी इंसान है ध्वनि तौर पर मजबूत होना चाहता है तो ज्यादा इंपोर्टेंट है हमारे विचार क्योंकि जो परिस्थिति है वह सभी के लिए एक समान है अब हर अनुपात में इसका जो भी लेवल है उसी के अनुपात में उसका नुकसान भी हो रहा है जिसे अगर हम गरीब और की बात करें तो चिताणा वह कमाते थे उस आफ उनका नुकसान और है मध्यवर्गीय परिवारों की करें तो उसी अनुपात में उनका और है और इसी तरीके से बड़े-बड़े उद्योगपतियों काफी नुकसान हो रहा है तो सारे की सारी हमलोग ऐसी परिस्थिति में है जहां पर सामान्य नहीं है ऐसे में हमारे विचार क्योंकि जैसे अभी हम गरीब भाइयों की बात कर रहे थे और मैंने बताया भी कि अगर मेरे सामने मेरे बच्चे भूखे हैं या मेरे को दिखाई दे रहा है कि कल के लिए मेरे को कोई सिक्योरिटी नहीं है ऐसे में मुझे को ने उसे जान से खतरे की बजाय ऐसा लगेगा कि मेरा परिवार भूख से नंबर चाहिए कहीं ऐसा ना हो कि डिफरेंस उसे आत्महत्या कर लेती थोड़ा बॉयज तू कम होगा वैसे में व्यक्ति अपनी को रोना से जान की परवाह ज्यादा नहीं करता वह सोचता है कि मैं बाहर निकलूं कमाऊ कुछ करो तो तनाव भी रहेगा कि अगर कुछ को ना हो गया तो घर पर खर्चा खर्चा बढ़ जाएगा बोझ बढ़ जाएगा तो ऐसे में हमारे विचार हमारे को शांत रख सकते हैं और विचार ऐसे है कि कोई भी चीज कभी भी स्थाई नहीं होती हर चीज इस लैब स्थापित होती है जैसे यह करुणा चल रहा है दो चार पांच महीने में स्थिति सामान्य हो जाएगी तो अगर हम ऐसे मैं अपने आप को यह समझाया है कि मुझे बाहर निकलना है मुझे कमाना भी और मुझे अपने आपको सुरक्षित भी रखना है बार-बार बार-बार आप अपने आपको कुछ सकारात्मक सुझाव हैं जैसे कि सरकार भी अपने प्रयास करिए हर व्यक्ति अपने लेवल पर अच्छी तरीके से प्रयास करें कि जल्दी से करो ना कि व्यक्ति नाया मेडिसन साए मम मैं बाहर निकल रहा हूं कमाने व्यक्ति को बिल्कुल मुझे सुरक्षित रखना है तो जब विमान फूल रहते हैं मतलब अपने हर काम के लिए सजग रहते हैं तो हमने बेहतर रहते हैं दूसरी बात यह कि हम जैसे शरीर को जो खाना देते हैं उसी से हमारी सेहत बनती है हम दिमाग को भी जो खाना देते हैं अगर हम रीडिंग एक्सरसाइज करते हैं हम इस तरीके की खबरें जो हमें पानी कर देती है वहां इतने मर गए वहां पर महामारी इस तरीके से फैल रही है सरकार मदद नहीं कर रही है वगैरह-वगैरह हम जितना ने चीजों से बचें मैं वह प्रति क्विंटल लें और प्याज के साथ सांसो के व्यूअर्स पॉजिटिव और रहने की दवाइयां लिखी ए पॉजिटिव प्रोडक्ट कोड होना पॉजिटिव से सभी तो जरा एलियन लाइफ में कम से कम पॉजिटिव रहने की जरूरत है मोहब्बत फिर सोच रखी और पॉजिटिव लाइफ में रहिए का यह क्योंकि यह घड़ी बहुत मुश्किल घड़ी ये और इसमें ऐसी राज की बहुत जरूरत है मैं एडाप्टर कशिका मैं आपके पास आ रहा हूं डॉक्टर डॉक्टर का शिकार जैन क्योंकि लोगों के सामने परेशानियां तो है यह जाहिर सी बात है कि करो ना बहुत बड़ी प्रॉब्लम है उसके बाद फिर माली तंगी अपने पेट की फितरत घर के फिर ऐसे मैं मैं चाहता हूं कि बहुत गुस्से में जो हमारे व से उन्हें बताएं कि क्या कुछ सावधानी करने की जरूरत है क्या कुछ स्थित लेने की जरूरत है इस मुश्किल घड़ी में जर्नी तरह से छुटकारा कैसे मिले थे ये दिखिए इस तनाव भरे माहौल में हमें यह समझना होगा कि को रोना ही नहीं बहुत सारी और भी ऐसी बीमारियां हैं जिनके साथ हम बहुत ही शांतिपूर्वक रहते हैं अ जैसे कि एचआईवी ऐड्स वह अब सिर्फ इसलिए नहीं डरता इंसान क्योंकि इसका कहीं नहीं कुछ इलाज है कि और है यह हम प्रिकॉशंस लेते हैं इसी तरीके से पुराना भी आने वाले कुछ समय में सामान्य हो जाएगा तो सबसे पहले हमें माइंड सेट करना होगा कि यह जो को रोना है इससे हमें डरना नहीं है आप इसके साथ हमें जीवन बिताना है तो हमें जो जरूरी सावधानियां है उसे अपने जीवन का हिस्सा बनाना है जैसे हम सब लोग साफ-सफाई रहते हैं खाना खाने से पहले हाथ होते हैं तो अब यह हमारी जिंदगी का एक हिस्सा बन जाना चाहिए हमारी आदत बन जानी चाहिए कि जब भी हम बाहर निकले तो हम मास्क का इस्तेमाल करें बार-बार अपने हाथ हुए या साथ-साथ जैसे हमारे जीवन में दिनचर्या का हिस्सा बन जाना चाहिए हमको सांसो के विवाह करने ही करने हैं ऐसे योग को पूरा विश्व जो मैंने मान चुका है और साइंटिफिकली प्रूव्ड हो चुका है कि हम सांसो के बयान को तो हमारा मस्तिष्क बिल्कुल शांत रहता है हमारी सांसों का और हमारे सोच का सीधा कनेक्शन है बिल्कुल जब हम बेदी एक्सर्साइज करेंगे मेडिटेशन करेंगे इसे टीम का हिस्सा बना लेंगे तो हमारा दिमाग बैकुंठ ऐसी आप शायद बहुत जरूरी है राजू पांडे साहब दिल्ली - जो दबा है वह जब यह जब एक तरह से कम होगा एनी सुकून तभी मिलेगा जब सारी चीजें इस तरह से पटरी पर होंगी मतलब सरकार को गरीबों और पिछड़ों बुनकरों मजदूरों पर ध्यान देने की जरूरत है राजू पांडे साहब और से चीजें डिबेट पर रह गए हालात से कांग्रेस और सोनिया गांधी जी नहीं अभी डिमांड किया था कि आप 80 करोड़ लोगों को खान एवं मुफ्त अनाज दे रहे तो कैश कभी कुछ इंतजाम न होना चाहिए साथ हजार यह rs.7000 गरीबों को मिल जाए तो और ज्यादा खतरा से राहत मिल सकती बहुत सी बातें हृदय पर रह गई लेकिन इतना तो जरूर है कि अब अगर लोगों को पटरी पर लाना है तो सरकार को बाकायदा एक रोड मैप मैकेनिज्म तैयार करना होगा इसके लिए बहुत-बहुत शुक्रिया राजू पांडे जी मेरे साथ जुड़ने के लिए तनुजा नियासा आपका बहुत व्यास शैलेश पांडे जी अब अब्बास साहब और डॉक्टर कशिका जाएंगी सभी का बहुत-बहुत शुक्रिया फ्रंट में जुड़ने के लिए अपना अंतिम रूप देने के लिए आज
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