Gussa Kaise Control Kare l Gussa Kaise Control Kiya Jata Hai l Dr Kashika Jain
हेलो माय डियर वनस आज इस वीडियो में बात करने वाली हूं गुस्से के बारे में आप तो जानते ही हैं कि गुस्सा कितना नेगेटिव इंटेंस इमोशन है आपने भी जरूर कभी ना कभी गुस्सा किया होगा शक्ल देखिए कभी गुस्से में कैसी हो जाती है आंखें देखिए कैसी हो जाती है नाक मुंह सब चढ़ जाता है बुरी तरीके से उस टाइम जितना बदसूरत इंसान लगता है इतना तो कभी लग ही नहीं सकता लेकिन फिर भी इंसान गुस्सा करता है और जब उसको दूसरे का गुस्सा झेलना पड़ता है तब उसके भाव कुछ अलग हो हैं उसको लगता है इतना गुस्सा करने की क्या बात थी जब व खुद गुस्सा करता है तो उसको जस्टिफाइड लगता है कि गुस्सा करने की तो बात ही थी तो गुस्सा जब आप पर होता है दूसरा कोई करता है तो आपकी अलग ही उसकी रीजनिंग होती है और जब आप खुद करते हैं तो अलग ही रीजनिंग होती है लेकिन गुस्सा आप खुद कर रहे हैं या फिर दूसरा कोई आप पर गुस्सा कर रहा है जभी भी गुस्से की परिस्थितियां बनती हैं तो इंसान बोखला जाता है बहुत ही बुरी हालत हो जाती है अब तमाम बातें पता होने के बावजूद भी कि गुस्सा करना गलत है अपना ही खून जला रहे हो जितनी देर आप दूसरे पर गुस्सा कर रहे हो उतनी देर आप भी उस गुस्से को झेल रहे हो बहुत कुछ हमारी बुद्धि को पता होता है लेकिन जब गुस्सा आता है तो यह बुद्धि कहां चली जाती है उस टाइम पर बस बाद में ओहो इतना क्यों चिलाया ऐसा क्यों बोला ये क्यों तोड़ा ये क्यों फोड़ा फिर वो भी गिल्ट आता है बाद में क्योंकि आपकी बुद्धि को जो आपने पहले ट्रेनिंग दी भी होती है वो काम नहीं आई भी होती है गुस्सा जो कि एक बहुत ही नेगेटिव इंटेंस इमोशन है आप पर हावी हो गया होता है तो उस गुस्से के हावी होने की वजह से आपकी बुद्धि उस टाइम पर काम नहीं कर रही होती है लेकिन बाद में वो कहते है ना बगल में छुपने के बाद जब खतरा सब चला गया तो फिर वह निकल कर आई अरे ऐसा हो जाता और वैसा हो जाता आपने फिल्मों में देखा होगा ना कि पहले कोई डरपोक पीछे छपक गया और फिर जब सिचुएशन नॉर्मल हो गई तो फिर निकल कर आया अरे मैं तो ऐसा कर देता मैं तो वैसा कर देता तो ऐसी फिर बुद्धि करती है आपकी जो आपने ट्रेनिंग दी हुई होती है कि उस टाइम पर ऐसा नहीं करना चाहिता वैसा नहीं गलत सही और फिर आपको उसका गिल्ट होता है रिग्रेट होता है क्योंकि गुस्से में बहुत कुछ भयंकर हो गया होता है आपको पता है बुद्धि फेल क्यों हो जाती है वो इसलिए फेल हो जाती है क्योंकि आपने अभी ट्रेनिंग बहुत अच्छे से नहीं दी होती है इसलिए तो मन जो कि भावनाओं का जगत है वह आप पर हावी हो जाता है और आपकी बुद्धि जो विचारों का जगत है जो विचारों से आपने तरह-तरह की टेक्नीक से अपने आप को ट्रेनिंग दी होती है वो फेल हो जाती है तो ट्रेनिंग के कच्चे होते हैं इसलिए आप अपने एंगर को सही तरीके से रिलीज नहीं कर पाते एंगर वैसे एक नेचुरल इंटेंस इमोशन है एक छोटा बच्चा जिसकी बहुत ज्यादा बुद्धि नहीं भी होती है आपने छोटे से छोटे बच्चे को भी गुस्सा होते हुए देखा होगा मुंह फ लाते हुए चिल्लाते हुए भह बह करके रोते हुए देखा होगा देखा है ना तो गुस्सा तो हमारे अंदर जन जाती ही ऐसे है और शुरुआत से ही हमें बहुत ही इंटेंस रूप में फील होता है लेकिन धीरे-धीरे हम ट्रेनिंग कर कर उस गुस्से को सही तरीके से रिलीज करने के तरीके ढूंढ सकते हैं गुस्से को को दबाना तो बहुत ही गलत है क्योंकि गुस्से को दबाते हैं आप उससे सप्रे होता है तो वो सप्रे आपको तरह-तरह की बीमारियां देता है और आप देखिए मान लीजिए आप कल रात किसी पर गुस्सा थे और आप उस टाइम पर अपने गुस्से को दबा भी गए अगले दिन जैसे ही आपको कोई मौका मिलेगा तो पिछले दिन का गुस्सा भी ऐड होकर वह सब कुछ निकल जाएगा होता है या नहीं होता है होता होगा मुझे पता है सुनते सुनते आप सब उसी इमेजिनेशन में खो गए हैं हां ऐसा हुआ था ऐसा हुआ था ऐसा हुआ था तो आप सबको पता है ऐ ही होता है तो गुस्सा जब जब भी आप दबाते हैं तो वो फिर दुगना चौगुना होकर किसी मामूली से ट्रिगर से भी आप फट पड़ते हैं और फिर आप बाद में पछताते ही रहते हैं तो यहां पर क्या करना है मैं गुस्सा दबाने के लिए नहीं कहूंगी मैं आपको बस गुस्से को सही तरीके से रिलीज करने के लिए जो आपको टाइम चाहिए उसके लिए आपकी बुद्धि को ट्रेनिंग करने के लिए सात ऐसी टिप्स बनाऊंगी बताऊंगी जिससे कि जब वो इमोशन आप पर हावी होना हो उस टाइम पर आपकी बुद्धि जो भी बैक सीट ले लेती है और बाद में दुपक के बाद निकल कर आती है उसे दुपक ना पड़े वो जो है ना वहीं पर ही उस टाइम पर आपके उस परवान चढ़े इमोशन को रोक ले और जब आप थोड़े ठंडे हो जाए शांत हो जाएं तो सही तरीके से अपने गुस्से को रिलीज करें क्योंकि जो जो भी लोग यह सोचेंगे कि मुझे कभी गुस्सा ना आए या मैं अपने गुस्से को दबाना सीख लू इसपे मास्टरी हासिल हो जाए वो हमेशा फेल होते रहेंगे क्योंकि गुस्से को दबाया नहीं जा सकता गुस्से को बस सही तरीके से रिलीज किया जा सकता है जिससे कि ना को ना तो आपको हाम हो और ना ही किसी दूसरे को हाम हो तो इस वीडियो में हम सीखने वाले हैं सेवन ऐसे तरीके जिससे कि आप अपने गुस्से के उबाल को उफान को उस टाइम के लिए थोड़ा शांत करें ताकि आपका और दूसरे का नुकसान होने से बचे और फिर बाद में नॉर्मल तरीके से रिलीज करें तो चलिए समझ लेते हैं क्या है तरीका टेक अ डीप ब्रेथ एंड काउंट टू 10 जब भी आपको लग रहा है कि मुझे बहुत गुस्सा आ रहा है तो गुस्से के ना वार्निंग साइंस होते हैं सिम्टम्स होते हैं आपका पता चल जाता है आपकी बॉडी ही क्योंकि बॉडी के अंदर वो इंटेंस इमोशन आप फील कर रहे होते हैं तो किसी की बॉडी स्टिफैन में बहस छिड़ जाती है आपने देखा होगा कि आपकी वॉल्यूम जो नॉर्मल होती है वो हाई होने लग जाती है तो अलग-अलग तरीके के कई सारे सिम्टम्स आपको महसूस होते हैं आपको बस क्या करना है अपने एक नोटबुक लेनी है उसमें जो जो वार्निंग साइंस है जो जो भी लक्षण आपको आते हैं जब जब आप गुस्सा होते हैं अपने पास्ट एक्सपीरियंस से देखते हुए कि जब जब भी आपने गुस्सा किया था तो आपको गुस्सा एकदम मुंह से निकलने से पहले क्या-क्या महसूस होना शुरू हुआ था चाहे आपके थॉट्स नेगेटिव हो गए थे आपकी बॉडी जो जो भी आपको क्लूज दे रही थी वो सब पेपर पर लिखी है उससे क्या होगा आप अवेयर हो जाएंगे तो जब भी नेक्स्ट टाइम गुस्सा कभी आपको पकड़ने की कोशिश करेगा तो आप उसी टाइम पर उस सिटम को उस वार्निंग साइन को देखते ही बस वहीं पर डीप ब्रीथिंग करने लग जाएं और अपने आप को ऐसे रिवर्स काउंटिंग कर सकते हैं 10 9 8 7 ऐसे करके या वन से लेकर 10 तक 1 2 3 ऐसे जैसे भी आपकी मर्जी काउंट करें और 10 बार इस तरीके से आप लंबी गहरी सांस लेंगे और छोड़ेंगे तो सांस का और सोच का बहुत गहरा कनेक्शन है जब भी आपकी सांसें लंबी और गहरी होती हैं तो आप उस वक्त गुस्सा नहीं कर सकते गुस्से में आपकी सांसें बहुत ही उतली उथली बहुत ही शैलो हो जाती हैं तो शैलो का अपोजिट है डीप जब आप कॉन्शियसली उस टाइम पर अपनी सांसों को लंबा और गहरा कर लेंगे कॉन्शियस ट्रेनिंग देंगे और ट्रेनिंग को मजबूत करेंगे आप दो-चार बार जरूर फेल होंगे लेकिन जब आप बार-बार बार-बार इस ट्रेनिंग को देते रहेंगे अपने वॉर्निंग साइन के को पकड़कर और इस ट्रेनिंग को बार-बार बार-बार देते रहेंगे तो एक दिन ऐसा लेवल आएगा आपका कि आपकी ये ट्रेनिंग आपके काम आ जाएगी आपकी बुद्धि बैक सट नहीं लेगी उस टाइम पर और इस तरीके से आप अपनी सांसों को उस टाइम पर लंबा गहरा कर लेंगे तो आप उस टाइम पर जो एकदम से अबब नॉर्मल एक्सप्रेशन करते हैं वो नहीं करेंगे और थोड़ी देर में ठंडा होने के बाद बोल देंगे भाई तुम्हारी बात ये बुरी लगी थी यह बात ऐसे नहीं ऐसे थी यह था वो था इस तरीके से रिलीज कर देंगे मतलब आप दूसरे को हर्ट करे बिना कोई भी मॉनेटरी नुकसान करे बिना भी अपनी बात को दूसरों के सामने रख पाएंगे यानी कि अपने अंदर के भाव जिन्होंने आपके अंदर गुस्सा पैदा किया क्योंकि एंगर एक सेकेंडरी इमोशन है उससे पीछे आप क्या तो इरिटेटेड फील कर रहे होते हैं आप डिप्रेस्ड फील कर रहे होते हैं आप एंसिस फील कर रहे होते हैं आप नेगलेक्टेड फील कर रहे होते हैं आप रिजेक्टेड फील कर रहे होते हैं कुछ भी ऐसा प्राइमरी इमोशन आपके अंदर च रहा होता है जो आपके गुस्से को ट्रिगर करता है तो वो जी आपकी वो जो आपकी प्राइमरी फीलिंग है उसको आप सही तरीके से एक्सप्रेस कर पाएंगे बिना किसी हार्म के और देखिए और है टेक अ वॉक आउटसाइड जब भी आपको लग रहा है कि गुस्सा आ रहा है तो बस निकल जाइए उस जगह को छोड़ दीजिए बाहर चले जाइए थोड़ी देर 15 20 मिनट आधा घंटा वॉक कर कर आइए जब आप बाहर जाएंगे तो आप सराउंडिंग से कनेक्ट होंगे और आप उस सिचुएशन से डिस्कनेक्ट हो जाएंगे जिस सिचुएशन में आपको लगातार ट्रिगर मिल रहा था तो क्या है कि नजारे बदलते ही आपके अंदर का नजरिया भी बदलना शुरू हो जाएगा जितना आप आग बबूला उस टाइम पर हो रहे थे आप देखेंगे कि आधा घंटे बाद आप उतना आग बबूला नहीं हो पाएंगे आपके अंदर वो इमोशंस का जो उबाल आ रहा था उफान आ रहा था वो बाहर सराउंडिंग्स चेंज होने से शांत हो जाएगा और फिर वो जो नुकसान आप कर बैठते और फिर बाद में आप ही रिग्रेट फील करते उस सब ड्रामे से आप बच जाएंगे और फिर वही चीज सेम समझते हुए कि किसने ट्रिगर किया यह गुस्सा किसने से मेरा मतलब आदमी ने नहीं मतलब कौन से इमोशन ने ट्रिगर किया किस सिचुएशन की वजह से क्या ऐसा हुआ जिसकी वजह से आप ट्रिगर हो गए थे उसको समझते हुए उसको बहुत ही आसानी से रिलीज कर पाएंगे ऐसे ही देखिए लाफ और वच समथिंग दैट इंक्लूड्स ह्यूमर कुछ भी ऐसा आप जो है ना देखिए जिसमें कुछ भी ऐसा हो कोई कॉमेडी ह्यूमर हो कुछ भी ऐसा है ना या हंसना शुरू कर दीजिए जसे आप बोलेंगे पागल हैं क्या हम हमको हंसना से दिखा रहे हो ऐसे में गुस्सा आ रहा है तो हंस कैसे सकते हैं भाई देखो मैं ट्रेनिंग की बात कर रही हूं मैंने तो शुरुआत में ही बोला है कि ये बहुत मुश्किल है कितनी भी आप ट्रेनिंग देते हैं तो आपकी वो ट्रेनिंग जो है ना जिसको हम बुद्धि कहते हैं वो बैक सीट ले लेती है जब इमोशन बहुत ज्यादा हावी होता है तो मैं कह ही नहीं रही हूं आसानी मैं तो खुद ही कह रही हूं ये बहुत मुश्किल है लेकिन हर मुश्किल काम को भी बार-बार बार-बार ट्रेनिंग से आसान बनाया जा सकता है तो आपको उसकी ट्रेनिंग देनी पड़ेगी तो जभी भी आपको गुस्सा आ रहा है आप अपने इमोशन को अंडरस्टैंड कीजिए कि ये जो मुझे गुस्सा है क्यों फील हो रहा है किसने इसे ट्रिगर किया और उस बात पर हंसना शुरू कर दीजिए क्योंकि आप एकदम से अब नॉर्मली हंसना शुरू कर देंगे तो आपका ब्रेन कंफ्यूज हो जाएगा कि भाई वो कहता है ना मैं रोऊ या हंसू कंफ्यूज हो गया पूरा कि मैं गुस्सा करूं या ये हंसने की बात है तो आप ना इस तरीके से हंसना शुरू कर दीजिए ठीक है आपको लगेगा क्या अजीब सी ट्रेनिंग है बट अजीब सी जरूर है लेकिन कमाल की है आप कर कर तो देखिए ऐसे गुस्सा कर रही है ले फिर आ गया व उठा के एक गुस्सा आप हसना शुरू कर दीजिए या उस टाइम पर आप कोई भी कॉमेडी मूवी या कुछ भी इस तरीके का ह्यूमर का कुछ स्टैंड अप कॉमेडी वगैरह इस टाइप का कुछ भी ऐसा सुन लीजिए तो उससे क्या होता है कि उससे फिर से आपके अंदर के वो मेंटल पैटर्स जो एकदम से आप पर हावी हो रहे थे वो उस टाइम के लिए टेंपरेरी वहां से कनेक्शंस आपके ब्रेक हो जाते हैं और फिर इतने में आप ठंडे हो जाते हैं क्योंकि वास्तव में जितना आग बुबूल आप उस टाइम पर हो रहे होते हैं वो समय बीतने के बाद आधा एक घंटा दो घंटा बीतने के बाद आप उस इंटेंसिटी से उस चीज को एक्सप्रेस नहीं करते क्योंकि 50 पर तो आप वहीं डीले हो जाते हैं आपको समझ में आ जाता है कि आप जरा जरा सी बात पर बम की तरह हटने के लिए तैयार रहते हैं इतनी कोई बड़ी बात नहीं थी तो आपको भी सेल्फ रिलाइजेशन हो जाता है और जो बाकी बचा कुचा है उसमें भी आपको समझ आ जाता है अपने पास्ट एक्सपीरियंस से कि मैंने इतना गुस्सा किया था उसका कोई बेनिफिट तो हुआ नहीं और सिचुएशन बिगड़ी जाती है मैं जिस पे गुस्सा करता हूं फिर वो भी बोखला जाता है वो भी दश में आ जाता है फिर हम दोनों में गुथ मगता लड़ाई हो जाती है और उसका और ज्यादा नेगेटिव आउटकम निकलता है तो आपकी बुद्धि सही तरीके से काम करने लग जाती है और आप सही तरीके से रिलीज करना शुरू कर देते हैं तो इसलिए ये तरीके हैं गुस्से को सही तरीके से बाहर निकालने के अपने को कंट्रोल करने के और देखिए जी लिसन टू योर फेवरेट म्यूजिक संगीत है ना हमारे म्यूजिक से बहुत ही डीप कंडीशनिंग हुई ई है जब भी हम कोई अच्छा फेवरेट अपने मनपसंद सूथिंग म्यूजिक सुनते हैं तो उससे हमारा माइंड बहुत रिलैक्स हो जाता है म्यूजिक हमें बहुत डीप कनेक्ट करता है आप देखिए ना किसी का ब्रेकअप हो गया है उस टाइम पर वो टूटे हुए दिल के गाने सुने तो और ज्यादा उसे दुख महसूस होता है और ज्यादा उसे रोना आ जाता है तो म्यूजिक आप जिस क्वालिटी का सुनते हैं जिस तरीके की सिचुएशन में वो और कनेक्टिंग हो जाता है अब आप गुस्से में है तो कैसा म्यूजिक सुनेंगे कमिंग म्यूजिक एक हैप्पी म्यूजिक सुनेंगे तो उससे क्या होगा कि आपके अंदर वो जो हैप्पी हार्मोस है उस टाइम पर रिलीज होंगे क्योंकि जो भी आप क्लू अपने ब्रेन को देते हैं अपने सबकॉन्शियस को जो भी ग्लू देते हैं सबकॉन्शियस उसी तरीके के न्यूरोट्रांसमीटर्स उस तरीके के केमिकल्स रिलीज करना स्टार्ट कर देता है तभी आप गुस्से में है उस टाइम पर अपना फेवरेट म्यूजिक समझें सुनेंगे या कोई भी सूथिंग म्यूजिक सुनेंगे तो आपका मन शांत होना शुरू ही हो जाएगा फिर से मन शांत होगा तो फिर से खुद पर ही शर्म आएगी इतना गुस्सा होने वाली क्या बात थी और फिर व जो थोड़ा मोड़ा आपके अंदर होगा उसे सही तरीके से बाहर निकाल लेंगे और देखिए ऐड चेंजेज टू योर रूटीन जब हम अपने रूटीन को कुछ चेंजेज कर लेते हैं ना मतलब हम अपने सराउंडिंग्स को चेंज करते हैं अपने जो भी हमने अपने रूम को स्पेस को ऑर्गेनाइज कर रखा है उसमें कुछ भी शिफ्ट करते हैं तो हमारी एनर्जी जरूर शिफ्ट होती है या हम अपने रूटीन को चेंज करते हैं तो उस सबसे भी कुछ एक्सरसाइजस ऐड करते हैं कुछ आउटडोर एक्टिविटीज ऐड करते हैं लोगों के साथ गपशप ऐड करते हैं कुछ अपने गोल पर फोकस करना किसी भी तरीके से हम कुछ भी अपना स्पेस चेंज करें अपना रूटीन चेंज करें तो उस सबसे एक्टिविटीज से भी हमारे अंदर के इमोशंस चेंज होते हैं और जब हमारे इमोशंस चेंज होते हैं हमारी अंडरस्टैंडिंग भी बेटर होती है तो वहां सबसे हम ऑब्जर्वेशनल लर्निंग करते हैं और हम देखते हैं कि सिचुएशंस को जिस तरीके से आज हम आज तक हम हैंडल करते आए हैं उनको और बेटर तरीके से हैंडल भी किया जा सकता है तो वहां पर धीरे-धीरे एनवायरमेंट से भी हमारी ट्रेनिंग हो जाती है और हम देखते हैं कि इतने सारे और भी लोग हैं इस दुनिया में जो कि अपने गुस्से को सही तरीके से रिलीज करना जानते हैं अगर यह कर सकते हैं तो हम भी कर सकते हैं तो आप कुछ भी चेंज कीजिए आप देखेंगे हर चीज से आपकी ट्रेनिंग ही हो रही है और ट्रेनिंग जितनी ज्यादा पक्की होगी उतना ज्यादा आप अपने इमोशंस पर उस टाइम पर काबू कर पाएंगे और थोड़ी देर बाद उन्हें सही तरीके से रिलीज कर पाएंगे लर्न टू फॉरगिव माफ करना सीखिए कहना जितना आसान है शायद करना उतना आसान होता नहीं है लेकिन मैंने क्या बताया कि परफेक्ट ट्रेनिंग से हर चीज पॉसिबल है आपको जितना माफ करने की आदत होगी उतना आप गुस्से से कम से कम भरेंगे क्योंकि जिन लोगों को माफ करने की आदत नहीं होती हर चीज को बस मन में सजोड़ लेने की आदत होती है कई बार वो गुस्सा कर नहीं सकते हैं क्योंकि उन पर ही भारी पड़ जाएगा क्योंकि गुस्सा सिर्फ आप अपनों पर कर पाते हैं या जिसको आप अपने से कमजोर मानते हैं उस पर ही कर पाते हैं लेकिन जिसको भी आप अपने से से शक्तिशाली मानते हैं या कोई अनजान अजनबी होता है उस पर आप कभी गुस्सा करते नहीं है क्योंकि आपको उसकी कंसीक्वेंसेस भी पता होते हैं तो आप सबसे ज्यादा हार्ड जो होते हैं टफ होते हैं और बहुत ज्यादा कहते हैं ना हार्श बिहेवियर जो करते हैं वो अपने क्लोज लोगों के साथ ही करते हैं या कमजोर हो पर करते हैं आपको समझना है कि जितना आप अपने आप को ट्रेनिंग देंगे चीजों को छोड़ने की माफ करने की उतना आपके अंदर गुस्सा कम से कम पैदा होगा वरना आपके अंदर गुस्सा पैदा होता रहेगा क्योंकि आपको सब कु जोड़ने की आदत है और गुस्सा ऐसा है कि वो जुड़ता रहता है जुड़ता रहता है और फिर बहुत ही ज्यादा भयंकर तरीके से निकलता है तो एक आदत डालिए अपने आपको हर दिन बताइए कि मेरे लिए किसी को भी माफ करना बहुत ज्यादा आसान है मैं अपने पास्ट के साथ हमेशा पीसफुल रहती हूं पास्ट इज ऑलवेज जस्टिस लोगों की अपनी लिमिटेशन है उसकी वजह से कोई ना कोई गलती उनसे हो जाती है सिचुएशंस इंपरफेक्ट होती हैं कंट्रोल से बाहर होती हैं तो जो मेरे हिसाब से नहीं हुआ मैं उसे रिलीज करती हो मेरे लिए फॉरगिव करना मूव ऑन करना बहुत आसान है इस तरीके की ट्रेनिंग बार-बार बार-बार अपने आपको को देंगे तो फॉरगिव करना सीख जाएंगे आप और फिर जब आपको अंदर ग्रजेस ही होल्ड नहीं होंगे तो वो ग्रजेस आपके एंगर को ट्रिगर करते हैं मैंने अभी बताया था ना आपको कि एंगर एक सेकेंडरी इ मोशन है तो एंगर जब आप पर हावी होता है तो उससे पहले प्राइमरी इमोशन होता है तो आप अगर लोगों को फॉरगिव नहीं करते हैं तो आप उनसे बहुत सारी ग्रजेस पाल के रखते हैं और वही ग्रजेस आपके अंदर एंगर को ट्रिगर कर देते हैं तो जब आप ग्रजेस को रिलीज कर देंगे तो ट्रिगर ही नहीं होगा तो एंगर कहां से आएगा भाई आगे देख लीजिए कम्युनिकेट टू योरसेल्फ बाय रिपीटिंग काम वर्ड्स है ना मैं एक काम पर्सन हूं टफ से टफ सिचुएशन में भी मेरे लिए रिलैक्स रहना बहुत ज्यादा आसान है कामने मेरे अंदर नेचुरली रहती है अगर मेरे को कभी भी गुस्सा आता भी है तो मुझे अपने गुस्से को सही तरीके से रिलीज करना आता है मैं मैं एक ऐसा इंसान हूं मेरे लिए माफ करना बहुत ही आसान है मेरे लिए किसी भी नेगेटिव एक्सपीरियंस को भूल जाना बहुत ही आसान है बार-बार बारबार रिपीटेडली आप अपने आप को बताएंगे कि आई एम अ काम रिलैक्स पर्सन तो रिपीटेडली कमिंग वर्ड्स को रिपीट रिपीट रिपीट रिपीट आप जितना ज्यादा करते हैं और जितना ज्यादा रिपीटेशन होता है आप कॉन्शियसली जितना ज्यादा रिपीटेशन करते हैं तो उसके इंप्रिंट आपके सबकॉन्शियस पे जहां से भावनाएं पैदा होती हैं उस पर चले जाते हैं और जहां से भाव पैदा हो रहा है वहीं पर ही ये छाप लग गई है कि भाई शांत सब ठीक है कोई ऐसी बात नहीं है तो वहां से आप देखते हैं कि नेचुरली आप अंदर से शांत होते चले जाते हैं लेकिन अगर आपने रिपीटेड ट्रेनिंग से अपने अंदर सबकॉन्शियस को प्रिंट्स नहीं दिए और आप ऊपर ऊपर के कम ट्रेनिंग से ही ऑपरेट करने की कोशिश कर रहे हैं तो फिर आधा अधूरा ज्ञान आपको फंसा देता है और वो काम नहीं आता उस टाइम पर जिस जिस टाइम पर रियल टेस्ट होता है उस टाइम पर नहीं आता तो इसी तरीके से आधी अधूरी ट्रेनिंग जो होती है वो आपके ना किसी काम नहीं आती है तो ट्रेनिंग हमेशा परफेक्ट होनी चाहिए प्रैक्टिस परफेक्ट होनी चाहिए तो आपको वह परफेक्ट प्रैक्टिस करने के लिए सिंपल सा है रिपीटेशन जितना ज्यादा आप रिपीट करोगे अपने आप को कि मैं एक काम पर्सन हूं मुझे अपने एंगर को समझना और पॉज लेना और उसे सही समय पर सही तरीके से रिलीज करना आता है तो बार-बार बार-बार यह चीज रिपीट करने से आप देखेंगे कि आप 3 महीने से लेकर 6 महीने तक का टाइम आपको ल गा इस ट्रेनिंग में और आप एक बिल्कुल डिफरेंट पर्सन बन जाएंगे जिसका सेल्फ कंट्रोल बहुत अच्छा है ना वो सफोकेट हो रहा है और ना ही वो किसी की दूसरे की जिंदगी को हेल बना रहा है और आपके जो रिश्ते खराब हो जाते हैं गुस्से की वजह से आपकी जो सेहत खराब होती है गुस्से की वजह से वो सब बच जाएगा और आप बहुत ही अच्छी तरीके से अपनी जिंदगी को जी पाएंगे तो उम्मीद करती हूं कि ये वीडियो आपके जरूर काम आएगा और आप बहुत ही समझदारी से इस ट्रेनिंग को अपने ब्रेन को देंगे और अपने आपको और अपने रिश्तों को खुशहाल बना लेंगे मैं मिलूंगी आपसे नेक्स्ट वीडियो में आप अपना खास ख्याल रखेगा
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